नई दिल्ली। बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले आम चुनाव देश की राजनीति के लिए निर्णायक माने जा रहे हैं। अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद यह पहला राष्ट्रीय चुनाव है। इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, लंबे समय से सत्ता में रही अवामी लीग की गैरमौजूदगी और विपक्षी दलों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा ने चुनावी तस्वीर को पूरी तरह बदल दिया है। बदले हालात के चलते नतीजों को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है और किसी भी दल की जीत को लेकर स्पष्ट अनुमान लगाना मुश्किल हो गया है।
भारी सुरक्षा के बीच हिंसा की छाया
इस चुनाव में करीब 12.7 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। अंतरिम सरकार ने निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान के लिए व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए हैं। चुनाव के दौरान नौ लाख से अधिक सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है, जिनमें लगभग एक लाख सेना के जवान शामिल हैं। इसके बावजूद हिंसा की घटनाएं चिंता बढ़ा रही हैं। दिसंबर 2025 में चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के बाद से अब तक कम से कम 16 राजनेताओं की हत्या हो चुकी है, जिससे चुनावी माहौल लगातार तनावपूर्ण बना हुआ है।
बीएनपी और जमात-ए-इस्लामी के बीच मुख्य मुकाबला
मई 2025 में अंतरिम सरकार ने सुरक्षा कारणों और पूर्व आंदोलनों में हिंसा के आरोपों के चलते अवामी लीग की गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसके बाद चुनाव आयोग ने भी पार्टी का पंजीकरण निलंबित कर दिया। वर्ष 2008 के चुनाव में लगभग 50 प्रतिशत वोट हासिल करने वाली इस पार्टी के बाहर होने से उसके लाखों समर्थक खुद को राजनीतिक रूप से अलग-थलग महसूस कर रहे हैं। मौजूदा चुनाव में सीधी टक्कर बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) और जमात-ए-इस्लामी के बीच मानी जा रही है। हालिया पोल संकेत देते हैं कि बीएनपी को मामूली बढ़त हासिल है, हालांकि जमात-ए-इस्लामी की स्थिति 1991 के अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन—18 सीटें और 12 प्रतिशत वोट—से बेहतर रहने की संभावना जताई जा रही है।
कट्टरता, अल्पसंख्यक सुरक्षा और भारत विरोधी भावनाओं पर चिंता
रिपोर्ट में भारत विरोधी भावनाओं के उभार और हिंदू अल्पसंख्यकों पर संभावित हमलों के बढ़ते जोखिम को लेकर गंभीर चिंता जताई गई है। जमात-ए-इस्लामी ने सोशल मीडिया अभियानों और छात्र आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाकर अपना आधार मजबूत किया है। वहीं, बीएनपी पर रंगदारी और भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं, जिससे शहरी युवाओं में असंतोष देखने को मिल रहा है। ऐसे में अवामी लीग के लाखों समर्थकों का रुख—वे किसे वोट देंगे या मतदान से दूरी बनाएंगे—चुनाव के नतीजों को तय करने वाला अहम कारक माना जा रहा है।
अमेरिका में भी उठा अल्पसंख्यकों पर हिंसा का मुद्दा
बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ कथित हिंसा के विरोध में अमेरिका के 25 शहरों में शांतिपूर्ण रैलियां आयोजित की गईं। भीषण ठंड और बर्फबारी के बावजूद आयोजित इन प्रदर्शनों के जरिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और मानवाधिकारों की स्थिति की ओर खींचने की कोशिश की गई।
